SEO क्या है और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन के प्रकार

SEO एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा वेबसाइट या ब्लॉग के कंटेंट को ऑप्टिमाइज करके सर्च इंजन पर किसी कीवर्ड पर अच्छी स्थिति या बेहतर रैंकिंग दिलवा सकते हैं. SEO का पूरा नाम है “Search Engine Optimization“.

एसईओ शब्द के दो सार्थक भाग हैं. एक है सर्च इंजन और दूसरा है ऑप्टिमाइजेशन. तो SEO एक प्रकार की तकनीकी वेब रणनीति है जो सर्च इंजन के लिए वेब पेज को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए है.

इसे दूसरे तरीके से भी कहा जा सकता है.

सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन किसी ब्लॉग / वेबसाइट को विभिन्न सर्च इंजनों में अच्छी स्थिति या खोज परिणामों के पहले पृष्ठ पर लाने की रणनीति या प्रक्रिया है. SEO हमारे ब्लॉग को गूगल में प्रथम रैंक पर लाने में मदद करता है. यह हमारे वेबसाइट को ऊपर रखकर उसमें ट्रैफिक को भी बढ़ाता है. 

SEO का फुल फॉर्म क्या है?

SEO का फुल फॉर्म है “Search Engine Optimization“.

एसईओ का हिंदी रूपान्तरण “सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन“.

SEO कितने प्रकार का होता है?

मूल रूप से SEO या सर्च इंजन ऑप्टिमाइज़ेशन चार प्रकार के होते हैं.

1. On Page SEO

On Page SEO वेबसाइट के कुछ आंतरिक कामकाज होते हैं जो सर्च इंजन को वेबसाइट के बारे में पता लगाने और वेबसाइट को आसानी से खोजने की अनुमति देगा.

एसईओ के मामले में ऑनपेज एसईओ बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर यह नहीं कि है तो सर्च इंजन आपकी साइट को खोजने में सक्षम नहीं होगा. इसलिए यह काम बहुत कुशलता से करना होगा.

2. Off Page SEO

Off Page SEO किसी भी वेबसाइट के अथॉरिटी और मान सम्मान को बढ़ाने की प्रक्रिया है. उदाहरण के लिए, अपनी साइट के लिंक को अन्य विभिन्न साइटों पर साझा करना जो आपकी साइट को किसी अन्य लोकप्रिय वेबसाइट पर लिंक करते हैं.

अपनी साइट के लिंक सोशल मीडिया पर साझा करना ऑफ-पेज एसईओ का बहुत बड़ा हिस्सा है. Offpage SEO एक बहुत बड़ा और दीर्घकालिक काम है. इसलिए अगर आपको नियमित रूप से Offpage SEO करना है, तो इसके लिए सही तकनीकों के पालन करने कि आवश्यक्ता है.

आप इस लिंक पर क्लिक करके Off Page SEO के बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं.

3. Technical SEO

Technical SEO एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें वेबसाइट के सर्वर और यूजर इंटरफेस पर फोकस किया जाता है.

उदाहरण के लिए साइट पर एसएसएल का उपयोग करना, वेबसाइट को मोबाइल फ्रेंडली बनाना, साइटमैप का प्रयोग करना, AMP का इस्तेमाल करना, Structured Data का प्रयोग करना आदि टेक्निकल SEO में शामिल हैं. किसी वेबसाइट के लिए टेक्निकल SEO बहुत महत्वपूर्ण है. 

4. Local SEO

Local SEO ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अपने वेबसाइट को लोगों को ढूंढने और प्राप्त करने में मदद करना है. उदाहरण के लिए यदि आपका कोई काफी शॉप है तो आप Landing Page बना सकते हैं और Store Locator का इस्तेमाल कर सकते हैं.

SEO के अलग अलग तकनीक

मूल रूप से SEO में तीन तरह के तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी जानकारी हम नीचे दे रहे हैं.

1. White Hat SEO

व्हाइट हैट एसईओ वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी अवैध साधन का सहारा लिए बिना सर्च इंजन में एक वेबसाइट को रैंक किया जाता है. यह विधि सभी प्रकार के सर्च इंजनों का समर्थन करती है और व्हाइट हैट एसईओ में कोई रिक्स नहीं है.

White Hat SEO दो प्रकार के होते हैं.

i. Paid SEO

जिस SEO को करने के लिए Google को भुगतान किया जाता है उसे Paid SEO कहते हैं. आपको Google विज़िटर से अपनी वेबसाइट के प्रत्येक क्लिक के लिए Google को भुगतान करना होगा.

Paid एसईओ Google के पहले पेज के शीर्ष पर पहुंचना आसान बनाता है, जिसके परिणामस्वरूप बहुत कम समय में Google से बहुत सारे विजिटर आते हैं.

ii. Organic SEO

जिस SEO के लिए Google को भुगतान नहीं किया जाता है उसे ओर्गानिक SEO कहते हैं. आपको बस अपनी बुद्धि का उपयोग करना है और Google को यह समझाने के लिए अपनी साइट में कुछ परिवर्तन करना है कि आपकी साइट में यह जानकारी है, तो सभी को Google के पहले पृष्ठ पर लाना संभव है.

ऑन और ऑफ़ पेज SEO ऑर्गेनिक SEO के ही भाग माने जा सकते हैं.

2. Black Hat SEO

ब्लैक हैट SEO वह विधि है जिसके द्वारा सर्च इंजन को अवैध तरीके से बेवकूफ बनाया जाता है और विभिन्न स्पैमिंग के माध्यम से अपने वेबसाइट को सर्च इंजन के पहले पेज पर सबसे ऊपर रैंक कराया जाता है.

यह एसईओ किसी भी सर्च इंजन का समर्थन नहीं करता है. तो यह अस्थायी है. ब्लैक हैट एसईओ आपकी साइट को किसी भी समय Google दंड दे सकता है ताकि आप सैकड़ों प्रयासों के बाद भी कभी भी अपनी साइट को सर्च इंजन में रैंक नहीं कर पाएंगे. इसलिए बेहतर होगा कि आप ब्लैक हैट एसईओ न करें.

3. Grey Hat SEO

Grey Hat SEO ऐसी विधि है जिसमें न White Hat SEO शामिल होता है और न ही Black Hat SEO. यह व्हाइट हैट मेथड से खतरनाक है लेकिन Black Hat जितना रिस्की नहीं है. इसमें आपके साइट को गूगल से Ban होने का डर नहीं होता है.

ब्लॉग के लिए SEO क्यों जरूरी होता है?

जैसा कि आप भी जानते होंगे, आज ब्लॉगिंग के क्षेत्र में काफी कंपीटिशन बढ़ चुका है. हर रोज ब्लॉग्स या सोशल साइट्स पर लगभग लाखों की संख्या में लोग अपने पोस्ट को पब्लिस करते हैं. लेकिन उनमें से जो SEO friendly और सबसे अच्छे पोस्ट होते हैं वही सर्च इंजन पर सबसे ऊपर के रैंक में आते हैं.

आमतौर पर एक सर्च इंजन के वेब क्रॉलर या रोबोट का वेब पर एक वेबपेज से दूसरे वेबपेज पर जाना होता है. ये रोबोट या क्रॉलर विभिन्न जानकारी एकत्र करते हैं और इसे एक विशिष्ट श्रेणी में व्यवस्थित करते हैं और यूजर के खोजे गए शब्दों या वाक्यांशों के अनुसार इसे सर्च इंजन रिजल्ट में प्रदर्शित करते हैं.

Google किसी वेबपेज को रैंक करने के लिए अपना एल्गोरिदम का प्रयोग करता है, उसके बाद ही निर्णय लेता है कि कौन सा पोस्ट किस कीवर्ड पर रैंक होगा. एक वेबसाइट बनाने के बाद उसमें अच्छी और हाई क्वालिटी की कंटेंट डालने के बावजूद यदि उसे SEO नहीं किया गया तो वेबसाइट बनाने का कोई फायदा नहीं होता और वह रैंक भी नहीं करती.

SEO करने के लिए बहुत सारे नियम बनाये गए हैं. SEO के द्वारा हम इन्हीं नियमों का पालन करते हैं. किसी भी कीवर्ड से जुड़ी जानकारी लाखों पेजो पर मौजूद रहती है. यदि आपको इन सभी से ऊपर आना है तो आपको SEO का उपयोग करना होगा. यही कारण है कि किसी भी ब्लॉग को सबसे ऊपर रैंक करवाने के लिए SEO किया जाता है.

SEO आपके ब्लॉग को काफी बेहतर बनाने में मदद करते हैं और इसकी मदद से उसका महत्व search engine में भी बढ़ाया जा सकता है.

वेबसाइट रैंक करवाने के लिए SEO के क्या क्या तरीके है?

SEO करने के लिए निम्नलिखत तरीके हैं-

1. कीवर्ड के बारे में रिसर्च करना

जब भी हम किसी ब्लॉग पर अच्छे क्वालिटी के आर्टिकल लिखते हैं तो हमें कीवर्ड की आवश्यकता पड़ती है. कीवर्ड के बारे में हम आपको बता दें कि कीवर्ड ऐसा शब्द या वाक्य होता है, जिसे हम गूगल पर सर्च करते हैं.

आर्टिकल लिखने से पहले कीवर्ड के बारे में रिसर्च करना बहुत जरूरी हो जाता है क्योंकि जब हम किसी पोस्ट के बारे में बिना कीवर्ड रिसर्च करने के बाद लिखते हैं, तो हमें ये पता नहीं होता कि हम जिस कीवर्ड पर लिख रहे हैं उस लोग सर्च भू करते हैं या नहीं. साथ ही यदि उसकी कंपीटिशन ज्यादा है तो उसे पहले पेज पर रैंक करवाना बहुत मुश्किल होता है.

कीवर्ड रिसर्च करने से पहले आपको इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि आपके आर्टिकल के लिए कौन सा कीबोर्ड बेहतर है. कीवर्ड रिसर्च करने के लिए आपको टूल्स का उपयोग करना होगा.

इसके लिए कई सारे टूल्स उपलब्ध हैं, जैसे- गूगल कीवर्ड प्लानर, आरेफ, सेम रस, यूबर सजेस्ट आदि. किसी भी कीवर्ड की सर्च वॉल्यूम और कंपटीशन देखने के लिए इन टूल्स की जरूरत पड़ती हैं.

किसी भी कीवर्ड को सर्च करने से पहले आपको यह बात ध्यान में रखनी होगी कि जिसमें कंपटीशन कम हो, आपको वही कीवर्ड चुननी है, तभी आप अपनी साइट को रैंक करवा सकते हैं. यदि कम कंपटीशन वाले कीवर्ड्स पर आप लिखते हैं, तो इसे जल्द से जल्द ऊंचे रैंक पर किया जा सकता है.

हालांकि ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि यह 100% सही ही होंगे, लेकिन यह कुछ बहुत हद तक सही रहते हैं.

2. क्वालिटी कंटेंट लिखना

मुख्य कीवर्ड मिल जाने के बाद हमारा अगला कदम होता है एक क्वालिटी कंटेंट लिखना. जब हम किसी कीवर्ड को सर्च करके कंटेंट लिखते हैं, तो हमें इसके क्वालिटी का ध्यान रखना होगा.

अच्छी क्वालिटी के कंटेंट लिखते समय हमें यह ध्यान देने की जरूरत है कि कंटेंट में सही शब्दों का प्रयोग और आवश्यक जानकारियां उपलब्ध हो, क्योंकि लोग अनावश्यक कंटेंट पढ़ना पसंद नहीं करते.

उन्हें उनके जानकारियों के मुताबिक कंटेंट की आवश्यकता होती है और अच्छे कंटेंट लिखने पर ही इसे रैंक करने में भी आसानी होती है.

3. कीवर्ड को ऑप्टिमाइज करना

अपने आर्टिकल को SEO करने के लिए हमें मुख्य कीवर्ड को सही जगह डालना होता है, ताकि हमने जो कंटेंट लिखा है वह कीवर्ड के लिए ऑप्टिमाइज हो जाए.

कंटेंट में हमें शीर्षक, टैग्स, यू आर एल की संरचना इन सब में सही तरीके से कीवर्ड डालकर ऑप्टिमाइजेसन् करना होता है.

4. मेटा डिस्क्रिप्शन में कीवर्ड का इस्तेमाल करना

यदि आप गूगल में अपनी वेबसाइट को रैंक करना चाहते हैं, तो मेटा डिस्क्रिप्शन में कीवर्ड का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. मेटा डिस्क्रिप्शन वह होता है जो किसी व्यक्ति के द्वारा गूगल में कुछ कीवर्ड के सर्च करने पर उसके डिस्क्रिप्शन के तौर पर दिखाया जाता है.

डिस्क्रिप्शन आपके पोस्ट के बारे में गूगल को बताता है कि आपके पोस्ट में क्या लिखा है. यह लगभग 160 कैरेक्टर का होता है. इसके अलावा मेटा डिस्क्रिप्शन में कीवर्ड का इस्तेमाल करने से यह गूगल को आपकी पोस्ट की पूरी जानकारी प्राप्त होती है कि यह पोस्ट किस विषय पर लिखा गया है और इसमें किस तरह की जानकारी उपलब्ध है.

मेटा डिस्क्रिप्शन में कुछ ऐसे वर्ड्स क उपयोग करें जो यूजर को आकर्षित करे. इस प्रकार पोस्ट पर क्लिक होने कि संभावना बढ़ जाती है.

5. टारगेट और रिलेटेड कीवर्ड का उपयोग करना

Meta descriptions के आलावा आपके आर्टिकल में भी कीवर्ड को अच्छे से डालकर उसे ऑप्टिमाइज़ करना होता है जिससे गूगल को यह पता लग सके कि कंटेंट किस कीवर्ड को टारगेट करके लिखा गया है. ऐसा करने के लिए आपको अपने टारगेट कीवर्ड और रिलेटेड कीवर्ड को उपयोग करना होता है.

उदाहरण के रूप में आप समझ सकते हैं. आपको पोस्ट के टाइटल, पहले पैराग्राफ, हेडिंग, परमालिंक, इमेज आल्ट टैग में कीवर्ड का उपयोग करना होगा. ध्यान रहे कि एक कीवर्ड को बार बार उपयोग न करे. कीवर्ड का इस्तेमाल इस तरह से करें की यूजर को लेख पसंद आए और उन्हें कोई परेशानी न हो.

यदि आप बार बार एक ही कीवर्ड का उपयोग करते हैं तो आपको Google पेनालाइज भी कर सकता है. आप गूगल को बताने के लिए या अपने यूजर को पोस्ट पढ़ने में मदद करने के लिए जरुरी कीवर्ड और रिलेटेड कीवर्ड को बोल्ड या इटालिक कर सकते हैं.

6. Title Tags को ऑप्टिमाइज करना

आपके वेबसाइट के कंटेंट में उपस्थित टाइटल टैग सीटीआर बढ़ाने में मदद करते हैं. इसे सही ढंग से ऑप्टिमाइज़ करने की आवश्यकता होती है. आर्टिकल को क्रॉल करने पर सर्च इंजन इसके टाइटल टैग पर विशेष ध्यान देते हैं.

यदि इसे सही तरह से ऑप्टिमाइज किया जाए तो कंटेंट को सर्च इंजन में रैंक करने में कोई दिक्कत नहीं होती है.

7. कंटेंट की लंबाई

गूगल सर्च इंजन में कंटेंट की लंबाई काफी मायने रखती है. किसी ब्लॉग के लिए यदि अधिक शब्दों अथवा लंबे आर्टिकल लिखे जाएं, तो एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. बता दें कि कम शब्दों अथवा छोटे आर्टिकल की तुलना में लंबे आर्टिकल वाले साइट जल्दी रैंक करते हैं.

SEO Friendly आर्टिकल लिखने के क्या-क्या फायदे हैं?

यदि आप SEO friendly आर्टिकल लिखते हैं, तो इसके कई फायदे हैं जो निम्नलिखित हैं

  • SEO friendly आर्टिकल आपके साइट को नंबर वन पोजिशन पर रैंक कराने में मदद करता है.
  • एसईओ का अर्थ है कि गूगल को आपके वेब पेज के बारे में बताना. ताकि गूगल को आपके वेबसाइट को अच्छे से जान सके. इसलिए यदि आप SEO करते हैं तो आप गूगल आसनी से आपके वेबसाइट को समझ सकता है कि उसे किस कीवर्ड पर रैंक कराना है.
  • अपने आर्टिकल को SEO friendly लिखने के बाद आपके साइट में ट्रैफिक बढ़ेंगे, जिसके बाद आपके आर्टिकल से टॉपिक को सर्च करने पर वह गूगल के पहले पेज पर दिखेगी.
  • यदि आपके वेबसाइट की कंटेंट क्वालिटी अच्छी है, तो साइट पर अधिक लोगों के आने पर आपके इनकम में भी काफी वृद्धि होगी.

क्या SEO सीखना कठिन है?

इसका जवाब हाँ भी है और नहीं भी. इसे सीखना आसान है लेकिन इसे इमप्लेमेंट करना उतना ही कठिन है. कहने का मतलब ये है की आपको इसमें बहुत धैर्य की आवस्यकता है.

क्या हम खुद SEO कर सकते हैं?

जी हाँ दोस्तों आप खुद अपने ब्लॉग के लिए आसानी से SEO कर सकते हैं. जिससे आप अपने आर्टिकल को गूगल पर रैंक भी कर सकते हैं.

क्या SEO जीवित है?

जी हाँ, SEO हमेशा से जीवित था और जीवित रहेगा. SEO कभी मरा ही नहीं तो जीवित क्यूँ होगा. आप मेरे कहने का तात्पर्य समझ सकते हैं.

बेहतरीन SEO टूल्स कौन कौन से हैं?

SEO के सभी tools बेहतरीन हैं. ऐसा इसलिए क्यूँकि सभी tools के अलग अलग उद्देस्य होते हैं. कोई कीवर्ड रीसर्च के लिए उपायुक्त है, तो कोई long tail कीवर्ड के लिए, कोई किसी दूसरे कार्य के लिए.

वैसे कुछ टूल्स जो बहुत से कार्यों को करने के लिए काम आते हैं वो हैं –
Ahrefs: SEO Keyword Tool
SEMRush: Marketing SEO Tools
KWFinder: SEO Keyword Tool
Moz Pro: SEO Software
Answer The Public: Free SEO Tools

अंतिम शब्द

SEO का महत्व बहुत ही ज़्यादा है ब्लॉगिंग के सम्बंध में. तो यदि आपको SEO के बारे में जानकारी ही नहीं होगी तब आप बिलकुल ही इसे अपने ब्लॉग में इम्पलिमेंट नहीं कर सकते हैं. इसलिए सबसे पहले आपको SEO के सभी बेसिक को समझना और जानना होगा.

लोगों को सभी चीजों में बहुत जल्दी होती है. लेकिन SEO के बारे में चीजें बिलकुल ही उल्टी होती है. यहाँ पर चीजों को पूर्ण होने में काफ़ी समय लगता है. और सबसे महत्वपूर्ण चीज़ ये की आधा अधूरा ज्ञान भयंकर होता है, इसलिए अगर आप SEO सीख रहे हों तब आपको इसे पूर्ण रूप से सीखना होगा अन्यथा ये आपके लिए कुछ अच्छा करने के स्थान पर बुरा करने लगेगा.

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धन्यवाद.

Chandan is a proud geek and professional blogger for the last 10 years. He is one of the best Hindi bloggers of Indian who teaches Digital Marking through blogs and YouTube videos.

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